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Manch Sanchalan, Shayari, Lyrics, Bhashan.

गुरुवार, 30 दिसंबर 2021

Chhatrapati Shivaji Jayanti 2022 | छत्रपती शिवाजी जयंती 2022 || Shivaji Maharaj

 Chhatrapati Shivaji Jayanti 2022


गर्जन जिनकी बातों में थी, हुंकार वाणी की ध्वनि में

थी चाल चीते सी शिवा की, झंकार जानो अग्नि सी


ऐसे रणवीर मराठा वीर शिवाजी को शत शत नमन करते हुए हम आज जानेंगे की इस वर्ष शिवाजी जयंती कब है, और क्यों मनाते है हम शिवाजी जयंती क्या था ऐसा उनमे जो आज भी हम उनको याद करते है, और उनका गुणगान पुरे शान से करते है.


वीर शिवाजी एक ऐसे योद्धा जिन्होंने मुगलों से लोहा लिया, और अपने साम्राज्य की स्थापना की, वो वीर मराठा कभी झुका नहीं, न ही कभी हार मानी, बस अपने एकछत्र साम्राज्य के लिए अंत समय तक लड़ाई लड़ते रहे.

Shivaji Jayanti


ऐसे रणबांकुरे जो इतिहास के पन्नो में है, मगर हमारे दिलो में आज भी जिन्दा है, और हमेशा रहेंगे, क्योकि उन्ही की बदौलत हम आज चैन की सांस ले पा रहे है, वो सम्मान वो आदर हमेशा हमारे दिलो में उनके प्रति रहेगा.


    छत्रपति शिवाजी जयंती 2022 कब है


    छत्रपति शिवाजी जयंती महाराष्ट्र क्षेत्र के साथ साथ देश भर के विभिन्न क्षेत्रो में भी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है, शिवाजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र के शिवनेरी किले में, पुणे में हुआ था.


    शिवाजी का जन्म 1630 को 19 फरवरी के दिन हुआ था, ये दिन महाराष्ट्र के साथ ही पूर्ण भारतवर्ष के लिए भी महत्त्वपूर्ण है, क्योकि जिन्होने आजादी के लिए अपनी मातृभूमि के लिए जंग लड़ी, वो माँ भारती का लाल कोई आम तो हो ही नहीं सकता, वो तो किसी शेरनी की कोख से जन्मा कोई शेर ही हो सकता है, और वो थे शिवाजी महाराज.


    ऐसा शक्तिशाली राजा जो अपनी धरती और प्रजा के लिए जीवन भर बस युद्ध लड़ता रहा, हम उनको नमन करके श्रद्धांजलि अर्पित करते है.


    शिवाजी महाराज को अजेय राजा माना जाता है, उन्होंने ही मराठा साम्राज्य की नीव रखी थी.


    कौन थे शिवाजी शिवाजी का इतिहास


    कहते है की शिवाजी महाराज ने सिर्फ 16 वर्ष की आयु में ही पहली जीत हासिल कर ली थी, टोमा किले पर कब्ज़ा करके अपनी पहली जीत दर्ज करवाई थी, वही 17 साल की उम्र में जहाँ खेलने कूदने के दिन होते है, उन्ही दिनों में कोंडाना किलो और रायगढ़ का अधिग्रहण किया.


    शिवाजी की लडाईया


    शिवाजी ने अपने जीवन काल में बहुत सी लडाईया लड़ी और जीत हासिल की जिनमे से कुछ का वर्णन यहाँ किया जा रहा है.


    टोमा किला, कोंढाना किला और अफजल खान से लड़ी गई लडाईया, पावन खिंडी, कोल्हापुर, विशालगढ़ जैसी कई लड़ाई लड़ी.


    शिवाजी का जीवन


    शिवाजी की जीवनी के बारे देखे थो उन्होंने साम्राज्य के विस्तार के लिए, सोयराबाई, पुतालबाई, साईबाई और काशीबाई से विवाह किया था.


    शिवाजी के पुत्र संभाजी साईबाई से तथा एव तीन बेटिया अम्बिका बाई, रनुबाई और सखुबाई थी.


    वही सोयराबाई से पुत्र राजाराम और पुत्री दीपाबाई थी, सगुनाबाई से पुत्री राज कुंवरबाई थी, सकवर बाई से पुत्री कमलाबाई थी.


    छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु


    3 अप्रैल 1680 को सिर्फ 52 वर्ष की उम्र में, तेज बुखार एवं पेचिश के कारणवश हुई थी, तब वे रायगढ़ में थे, कुछ अन्य स्रोतो का कहना ये भी है की उनकी मृत्यु किसी साजिश के तहत हुई थी, ये अब भी एक रहस्य है जो उजागर नहीं हुआ.


    शिवाजी जयंती उत्सव


    इस दिन कई जगहों पर जुलुस निकाला जाता है, झाँकिया बनाई जाती है, कई कलाकार इसमें अपनी कलाकारी दिखाते है, नृत्य संगीत और नारों से एक भव्य नजारा बनता है.


    शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर पुष्प हार चढ़ाकर श्रद्धांजलि दि जाती है, और इस शानदार व भव्य दिन को यादगार बनाया जाता है.


    शिवाजी का राज्याभिषेक


    1674 में शिवाजी ने महाराष्ट्र में राज्य की स्थापना की, और शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ, शिवाजी के राज्याभिषेक में भी कई कठिनाइया आई, कई लोगो ने इसका विरोध भी किया.

     

     

    Holi Kab Hai 2022 Date and Muhurat | होली कब है तारीख व मुहूर्त | Holi Wishes New

     Holi

    होली रंगों का त्यौहार है, रंग जीवन का आधार है और बिना रंगों के तो ये सारी दुनियाँ सुनी सुनी सी लगती है, लेकिन हमारे भारत वर्ष में हर एक चीज का ख़याल रखा गया है, और इसीलिए रंगों का भी एक उत्सव एक त्यौहार हम मनाते है, जिसे हम होली कहते है.


    Holi Kab Hai Date


      2022 Mein Kab Hai Holi. 2022 में होली कब है तारीख


      होली वैसे तो हर साल हम फागुन महीने में ही मनाते है और, इस बार भी होली फागुन महीने में ही है, बस तारीख बदल जाती है.


      होली का पावन पर्व फागुन महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाया जाता है, और 2022 के वर्ष में ये त्यौहार शुक्रवार के दिन 18 मार्च को मनाया जाएगा.


      17 मार्च के दिन होलिका दहन किया जाएगा और 18 मार्च के दिन रंगोत्सव यानी की होली मनाई जाएगी, जिसे कई जगहों पर धुलंडी या धुलेटी भी कहते है.


      इस दिन हम एक दुसरे को रंग लगाते है और, बैर भाव भुला के एक दुसरे के गले मिलते है, साथ ही दोस्ती की और रिश्तो की एक नई शुरुआत करते है.


      Holika Dahan Kab Hai 2022. होलिका दहन कब है 2022


      2022 को गुरूवार के दिन होलिका दहन है, इस दिन होली जलाई जाती है, इसके पीछे भी एक कथा है, जो हम आपको आगे बताएंगे.


      होलिका दहन के समय शुभ मुहूर्त में होली जलाई जाती है, और फिर सभी लोग होलिका पूजन करते है, होली की परिक्रमा करके जल अर्पण किया जाता है, और नारियल इत्यादि होलिका में चढ़ाए जाते है.


      Holika Dahan Shubh Muhurat 2022. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2022


      होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 2022 में गुरूवार को है, गुरूवार 17 मार्च को ये शुभ पल आने वाला है और इसी शुभ मुहूर्त के पल में होलिका जलाई जाएगी.


      शुभ मुहूर्त: रात 9 बजाकर 20 मिनट और 55 सेकंड पर शुरू होगा, और 10 बजकर 31 मिनट और 9 सेकंड पर समाप्त होगा, इसी शुभ मुहूर्त के बिच ही होलिका दहन का कार्य किया जाएगा.


      Holika Dahan Kyo Karte Hai Katha. होलिका दहन क्यों करते है कथा


      बहुत समय पहले की बात है की एक बहुत ही बड़ा भक्त हुआ जिसका नाम हिरणाकश्यप था, उसने कई वर्षो तक भगवान की घोर तपस्या की, और इसी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान प्रकट हो गए.


      और कहा की हिरणाकश्यप मांग क्या चाहिए तुझे, धन, दौलत, ऐश्वर्य जो भी तुझे मांगना हो मांग ले, हम तेरी भक्ति और कठोर आराधना से प्रसन्न हुए.


      तब राजा हिरणाकश्यप ने कहा की प्रभु मुझे वचन दीजिए की, मैं जो भी मांगूंगा वो आप मुझे देंगे, ना नहीं करेंगे, तभी मैं आपसे कुछ मांगूंगा.


      इस पर भगवान ने कहा की बस इतनी सी बात, मैं वचन देता हूँ की तू जो भी मांगेगा, वो मैं तुझे दूंगा, मांग हिरणाकश्यप क्या मांगना है.


      तब हिरणाकश्यप ने कहा की प्रभु, मुझे ऐसा वरदान दो की मुझे कोई मार न सके, मैं अमर हो जाऊं. तब भगवान ने कहा की ये तो असंभव है, क्योकि जो जन्मा है उसका अंत तो निश्चित है, ये प्रकृति के खिलाफ है, कुछ और मांग.


      तब हिरणाकश्यप ने कहा की नहीं भगवन मुझे तो ये ही वर चाहिए, अगर आप ये वर नहीं दे सकते तो, ऐसा कीजिए की, मुझे देवता, दानव, गन्धर्व या कोई मनुष्य न मार सके, कोई जानवर न मार सके, मुझे कोई आकाश में न मार सके, धरती पर न मार सके, घर के अन्दर न मार सके, घर के बाहर न मार सके, न दिन को मार सके न कोई रात में मार सके.


      तब भगवान ने कहा की ठीक है, तथास्तु, ऐसा ही होगा, और प्रभु अंतर्ध्यान हो गए.


      तब हिरणाकश्यप को बड़ा गुमान हुआ उसके अन्दर अहंकार आ गया की अब मुझे कोई मार नहीं सकता, और उसने पाप करना शुरू कर दिया, पुरे शहर में ढिंढोरा पिटवाया की, आज से कोई भी भगवान की पूजा अर्चना नहीं करेगा, मैं ही तुम्हारा भगवान हु, मेरी पूजा करो, और जो ऐसा नहीं करेगा उसको मार दिया जाएगा.


      उसके पापो का बोलबाला था, और वो दिन प्रतिदिन इसमें बढ़ोतरी करता जा रहा है, लेकिन कहते है की हर चीज का अंत होना निश्चित है, और एस ही हुआ, हिरणाकश्यप के घर एक बालक पैदा हुआ जिनका नाम था प्रहलाद.


      प्रहलाद धीरे धीरे बड़ा होता गया और वो भगवन की भक्ति करता था, तो पिता ने उसे भी बहुत समझाया लेकिन वो नहीं माना, उसने कहा की आप पिता है, मेरे लिए पूजनीय है, भगवान समान है, और मैं आपका पुँजन भी करूँगा लेकिन, प्रजा को मत सताइए क्योकि वो भगवान का भजन करना चाहती है, इस तरह के वाद विवाद से पिता पुत्र में अनबन हो गई.


      कई बार भक्त प्रहलाद को यातनाए दि गई, पहाड़ से फेंका गया तो पहाड़ रुई का गद्दा बन गया, और ऐसी बातो से प्रहलाद का भगवान में विश्वाश और भी बढ़ता गया, और वो और भी मन से दिन रात प्रभु भक्ति में लीं होता गया.


      एक दिन हिरणाकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया जिनको वरदान मिला हुआ था की वो, आग से जल नहीं सकती.


      हिरणाकश्यप ने कहा की बहन होलिका प्रहलाद हमारे कहे अनुसार नहीं चल रहा है, और जब घर का ही कोई व्यक्ति हमारी बात नहीं मान रहा है तो, बाहर वाला कैसे हमारे सुन सकता है, इसलिए तुम प्रहलाद को अपनी गोद में बिठाओ और एक बड़ी चिता पे बैठो, तुम्हे तो कुछ होगा नहीं कियोकी तुम्हे वरदान मिला हुआ है, और प्रहलाद को ख़त्म करना बहुत जरुरी है, तब होलिका ये बात मान लेती है.


      Bhakt Prahlad Story



      बहुत ऊँची और बड़ी चिता सजाई जाती है और सारे नगर वासियों के समक्ष होलिका अपनी गोद में प्रहलाद को लेकर बैठती है, और फिर चिता में आग लगाईं जाती है, लेकिन कहते है की भगवान भक्त को जरुर बचाते है, और वही हुआ, होलिका को वरदान होने के बावजूद होलिका उस चिता में जल जाती है, और भक्त प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं होता, वो सकुशल उससे बाहर निकल आता है.


      बस इसी दिन से होलिका दहन मनाया जाता है, क्योकि असत्य पर सत्य की अधर्म पर धर्म की जीत हुई थी, भक्त प्रहलाद की कथा आगे और भी है.


      फिर एक दिन राजा हिरणाकश्यप एक लोहे का खम्बा गरम करवाता है जो इतना गर्म होता है की अगर कोई उसे छू भी ले तो वो भस्म हो सकता है, फिर प्रहलाद को बुलाया जाता है और हिरणाकश्यप कहता है की अगर तेरे भगवान में इतनी शक्ति है तो चल इस खम्बे को गले लगा ले, मैं भी देखता हूँ की कौन सा तेरा भगवान तुझे बचाने के लिए आता है.


      तब भक्त प्रहलाद खम्बे के पास जाता है, एकदम लाल अंगारों सा दहकता खम्बा देखकर किसीकी भी रूह काँप उठेगी, लेकिन जब प्रहलाद को खम्बे पे चींटिया चलती हुई नजर आती है तो, उसे अपने प्रभु पे भरोसा हो जाता है, की जब चींटियाँ गरम खम्बे पे चल रही है तो मेरे प्रभु मुझे भी तार लेंगे, वो तो मेरे पालनहार है, तो वो भक्त को कैसे मरने दे सकते है.


      और जैसे ही भक्त प्रहलाद गर्म खम्बे को अपनी नन्ही सी बाहों में भरने जाते है तो एक बहुत ही भीषण गर्जना के साथ वो खम्बा दो टुकडो में टूट जाता है.


      पूरा सभाग्रह दहल उठता है, और भयवश कांपने लगता है, मगर प्रहलाद अपने मुख से नारायण नारायण का जाप करते हुए दोनों हाथ जोड़े खड़े थे.


      तभी उस खम्बे में से एक ऐसा विचित्र कौतुहल जगाने वाल द्रश्य देखनेको  मिलता है, उसमे से जो बाहर निकलते है, उनका शरीर तो नर का था, मगर चेहरा शेर का था, हाथ पैर मनुष्य के थे मगर पंजे शेर के थे.


      नरसिम्हा का अवतार, जो आधा मनुष्य और आधा शेर था, भगवान विष्णु के इस रूप को देखकर जहाँ भक्त प्रहलाद ख़ुशी व आनंद से झूम रहा था, वही बाकी सभी लोग मारे डर के काँप रहे थे, भयभीत हो रहे थे.


      नरसिम्हा आगे बढे और हिरणाकश्यप को एक हाथ से उठाते है तब हिरणाकश्यप कहते है की, आप मुझे नहीं मार सकते क्योकि मुझे ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त है, तब भगवान विष्णु कहते है की ब्रह्मा जी के उसी वरदान को ध्यान में रखते हुए हमने ये रूप धारण किया है, और उसी के हिसाब से तेरा अंत होगा.


      फिर भगवान विष्णु उसे दरवाजे के बिच में अपनी जांघो पर लिटाते है और कहते है की बोल, तू धरती पर है की आकाश में तो वो कहता है की न धरती पर न आकाश में, आगे कहते है की तू घर में है घर के बाहर तो कहता है की न घर में हूँ न घर के बाहर.


      तब फिर कहते है की दिन है या रात, तो कहता है की न दिन है और न रात, तब कहते है की मैं देव, दानव, गन्धर्व, मनुष्य या जानवर कौन हूँ, तब कहता है की आप इनमे से भी कुछ नहीं है तब कहते है की अब तेरा अंत करने जा रहा हूँ, न तो तुझे किसी शस्त्र से मारूंगा न ही किसी अस्त्र से, तेरा अंत तेरा पेट व छाती फाड़ के करूँगा.


      और फिर भगवान नरसिम्हा अपने नाखुनो से हिरणाकश्यप का वध करते है, इस तरह भक्त को बचाने भगवान आए और भक्त व धर्म की जीत हुई.


      Holika Dahan Koun Si Disha Me Shub Hai  होलिका दहन कौन सी दिशा में शुभ है


      कहते है की जब होलिका दहन किया जाता है तो उससे पुरे साल भर का भविष्य ज्ञात हो जाता है की, आने वाला वर्ष हम सबके लिए शुभ होगा या हमें किसी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा.


      होलिका से उठने वाली लपटे कौन सी दिशा में अपना रुख करती है इसी से हम अनुमान लगाते है, और आगे के बारे में निश्चिंत हो जाते है


      अगर होलिका की अग्नि पश्चिम दिशा की तरफ उठती है तो आर्थिक स्थति में सुधार की गुंजाइश होती है, वही अगर अग्नि की ज्वालाए उत्तर की तरफ उठती हुई दिखाई दे जाए तो, कहते है की सुख शांति बनी रहती है, वही अगर लपटे दक्षिण दिशा की और उठे तो, उसे अच्चा नहीं माना जाता है, इसके विपरीत अगर ज्वाला पूर्व की और उठे तो, अच्छे रोजगार व स्वास्थ्य की दृष्टि से शुभ माना जाता है.


      Holi Par Nibandh Essay on Holi  होली पर निबंध


      रंगोत्सव यानि की होली, रंगों का एक पर्व जो भारतवर्ष में बड़े धूम धाम से मनाया जाता है, इस दिन सभी के मुखड़े रंग बिरंगे हो जाते है, सभी एक दुसरे को रंग लगाते है.


      जाती पाती का भेद भाव छोड़ कर सब एक दुसरे को गले लगाते है, बधाई देते है और खुशियाँ मनाते है, ये एक भाईचारे को बढ़ाने वाला त्यौहार है, जिसमे आपसी एकता और सम्बन्ध मजबूत बनते है.


      लोग इस दिन अपनी दुश्मनी भुला कर एक दुसरे को रंग लगाते है, और एक नए रिश्ते का शुभारम्भ करते है.


      पहले के जमाने जहाँ रंग सिर्फ गुलाल या प्राकृतिक ढंग से ही तैयार किए जाते थे, वही आज के इस युग में लोग कई तरह के आर्टिफ़िशियल रंग लगाते है, जिसके कारण लोगो को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जो स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सही नहीं है.


      ये रंगों का त्यौहार है हंसी ख़ुशी का पर्व है, तो इस दिन सभी लोग खुशियाँ ही मनाते है रंग लगाते है, और नाचते गाते है, कई जगहों पर आयोजन भी किये जाते है, जिसमे कई तरह के रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते है, जिसमे नाच गाना, हंसी ठिठोली शामिल होता है.


      बच्चे तो दो चार दिन पहले से ही इसकी तयारी में लग जाते है, और बहुत ही आनंदित होते है, बस इसी तरह हर वर्ष आप भी होली का ये दिलखुश पर्व मनाए, अपनों के संग और खुशियों से जिंदगी जीए.

       

      Wishes On Holi होली पर बधाई शायरी


      रंग भरे इन पलो को आओ, जीवन में भी उतार ले

      दुश्मन को भी गले लगा के, आओ जिंदगी संवार ले

      जात पात और उंच नीच की, आओ दीवार गिरा दे

      रंगी करके सारा आलम, खुशियों को निखार ले

      शनिवार, 18 दिसंबर 2021

      New Year Shayari Wishes || नए साल की बधाई शायरी || New Year Message 2022

      न्यू इयर 2022 आने वाला है और हम सबको इन्तजार है, ये नया साल हम सबके लिए खुशियाँ लेकर आए और सबको सुख शांति और आरोग्य प्रदान करे, यही कामना हम सबके लिए अपने दिलो में रखे और दुआ करे की कोई भी तकलीफ में न हो क्योकि पिछले दो सालो से हम सभी ने काफी तकलीफे झेली है.


      नया साल आए और हम बधाई न दे ये कैसे हो सकता है, हमारे दोस्त, रिश्तेदार सभी को हम हर साल विश करते है, बधाई देते है, इस बार भी हम कॉल करेंगे या WhatsApp पर बधाई भेजेंगे.


      दूर रहने से कोई दूर नहीं होता बस दिल दिल से मिलने चाहिए, एक दुसरे को याद करते रहने से रिश्तो में जान आ जाती है, सूखे और मुरझाए हुए रिश्ते फिर से जी उठते है, तो हमें कोशिश करते रहना चाहिए की हम रिश्तो को मरने न दे, क्योकि रिश्ते ही है जो हमें समझाते है की क्या अच्चा है क्या बुरा है, कौन अपना है कौन पराया है.


      happy new year


      नए साल की शायरी new year shayari


      रंग भरने जीवन में फिर, साल नया ये आया है

      मिटा तम के काले बादल, नया सवेरा लाया है

      खुशियों और उमंगो का, फिर बिगुल बजा देंगे

      दिल की धडकनों ने ये, नया तराना गाया है

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      Rang bharne jivan me phir, saal naya ye aaya hai

      Mita tam ke kale badal, naya savera laya hai

      Khushiyon aur umango ka, phir bigul baja denge

      Dil ki dhadkano ne ye, naya tarana gaaya hai

      `````````````````````


      उगता सूरज नयी किरणों की, सौगात लेकर आया है

      धरती ने भी कर के श्रृंगार, राहों को आज सजाया है

      नयी धून पे नया तराना, मन सरगम ने गाया है

      बढ़के बाहों में भर लो, खुशियों ने कदम बढ़ाया है

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      Ugata suraj nayi kirano ki, Saugat lekar aaya hai

      Dharti ne bhi kar ke shringaar, Raho ko aaj sajaaya hai

      Nayi dhoon pe naya tarana, Man sargam ne gaya hai

      Badhke baaho me bhar lo, Khushiyo ne kadam badhaya hai

      बुधवार, 22 सितंबर 2021

      अपना पहला भाषण कैसे दे | Apna Pahla Bhashan Kaise De | How to give your first speech on stage

      अपना पहला भाषण कैसे दे ये विचार सबके मन में हमेशा रहता है, अगर आज से पहले कभी आप मंच पर नहीं बोले हो, तो इन्ही सभी सवालों के जवाब हम आज देने की कोशिश करेंगे, आपके और भी कोई सवाल हो तो हमसे पूछ सकते है.


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        भाषण की शुरुआत कैसे करें



        भाषण की शुरुआत हमेशा अभिवादन से करनी चाहिए, उपस्थित लोगो का नाम आप जानते हो तो नाम और पद के साथ उनका अभिवादन करे, अन्यथा आदरणीय एवं सम्माननीय शब्दों का उपयोग भी आप कर सकते है, और अपना भाषण आप दे सकते है.



        अगर कही स्कूल में भाषण दे रहे हो तो कहे की, सभी आदरणीय गुरुजनों को प्रणाम करता या करती हूँ, और सभी दोस्तों एवं अतिथियों का तहेदिल से अभिवादन करता हूँ, आप यहाँ पधारे इसके लिए मैं आप सभी का धन्यवाद करूँगा और कोशिश करूँगा की अपनी बात आप तक पंहुचा सकू.



        बस आप इस तरह से बोलकर भाषण की शुरुआत कर सकते है, अलग अलग जगहों पर ये शब्द और बोलने की स्टाइल बदल जाएगी, बस आपको इतना ही ध्यान रखना है.



        प्रभावशाली भाषण कैसे दे



        दोस्तों आप अगर वाकई में प्रभावशाली भाषण देना चाहते हो तो, आपको कुछ बातो का ध्यान अवश्य रखना होगा, जैसे की आप जो भी कहने जा रहे हो, वो सुनी सुनाई बात न हो बल्कि आपने गहन अध्ययन करके वो जानकारी जुटाई हो, तभी आप उसे बेहद ठोस तरीके से कह सकते है.


        प्रभावशाली भाषण कैसे दे



        अगर उस जानकारी के बारे में आप खुद भी श्योर नहीं है तो फिर आप उसे कह भी देंगे तो उसमे वो ताकत वो आत्मविश्वाश नहीं होगा, और जब बात खोखली होगी तो लोगो के दिलो को नहीं छू पाएगी.



        इसलिए हमेशा आप पूरी तैयारी करके ही कोई भी बात बोले तो ज्यादा बेहतर होगा, और आपके भाषण में भी जान आ जाएगी, साथ ही आप जो कहेंगे वो लोगो पर प्रभाव डालेगा, इसलिए हमेशा सही बात कहे.



        मंच पर भाषण देना कैसे सीखे



        मंच पर भाषण देना चाहते हो तो पहले ये जान लो की मंच क्या है, भाषण क्या है, भाषण कितने प्रकार के होते है, वर्ना आप बस दो शब्दों में ही अपनी कहानी ख़त्म कर दोगे, फिर अ.. ... इस तरह से करोगे.



        तो दोस्तों मंच क्या है, मंच वो जगह होती है जहाँ पर खड़े होकर आप अपनी बात लोगो तक पहुचाते हो, मंच को स्टेज भी कहते है.


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        अब समझते है की भाषण क्या है तो दोस्तों जो बात आप कहते हो उसे ही भाषण कहते है, मतलब की बोलना, आप जो बोलते हो उस कला को ही भाषण का नाम दिया गया है.



        भाषण देना भी एक तरह की कला या आर्ट होता है, यानी की आप अपनी बात किस अंदाज में किस लहजे में किस ढंग से कहते हो, उसी को कला कहते है, और आप अच्छे तरीके से अगर बात कहते हो तो आप को भाषण की कला आ गई समझो.



        भाषण देने वाले को हिंदी में क्या कहते है



        ये सवाल कई लोगो ने पूछा है तो दोस्तों जो भाषण देता है या स्टेज पे बोलता है उसे इंग्लिश में एंकर कहते है और हिंदी में वक्ता कहते है, और जो सुन रहे है उनको श्रोता कहा जाता है.



        भाषण कैसे दिया जाता है



        भाषण देने का कोई नियम या कानून नहीं है की आपको ऐसे ही या, इसी तरीके से देना होगा, आप अपनी बात किसी भी तरीके से रख सकते है, बस वो बात आप जहाँ तक पहुचाना चाहते हो वहां तक पहुच जाए तो, समझो आपका भाषण सफल हो गया.



        लेकिन भाषण देने के कुछ तौर तरीके भी कई लोगो ने इजाद किए हुए है, अगर आप चाहे तो आप उनको फॉलो कर सकते है, जैसे की पहली बार स्टेज पे जाने पर सभी का अभिवादन करना, ये अच्छी बात भी है, इससे आपके सभी होने का पता चलता है.


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        लेकिन कोई ड्रेस कोड या ऐसी कोई विषय वस्तु नहीं है जो आपने अगर नहीं की तो आपको कोई सजा हो जाएगी, बस आप बात सही अंदाज में कहे, लोगो का मनोरंजन करे, और जो वक्त मिला है उसमे भरपूर जोश बनाए रखे, साथ ही आपको तालियों की गडगडाहट भी मिल जाए तो, वाह तेरा क्या कहना.



        समाज में कैसे बोलना चाहिए



        दोस्तों समाज वो होती है जो हमें एक बनाती है, हमें मिल जुल कर चलने का साहस देती है, समाज में जब भी आप बोले तो हमेशा विनम्रता से बोले, आक्रोश में बात न करे, क्योकि इससे बड़े बुढो या बुजुर्गो के दिल को ठेस पहुच सकती है.



        समाज का कार्य होता है एकजुटता बनाए रखना, और समाज हमें अनेक में से एक बनाती है, इसलिए कभी भी अनैतिक बात न कहे, ये हमारे बाप दादाओं के जमाने से या उससे पहले से है, इसलिए भी आदर करना चाहिए, और समाज निष्पक्ष राय ही लगभग देता है, अगर फिर भी कोई ऐसी बात है जो आपको अखरती है तो आप नम्र होकर अपनी बात रखे, इससे लोगो में आपकी छवि अच्छी बनेगी.



        26 जनवरी पर भाषण कैसे दे / 15 अगस्त पर भाषण कैसे दे



        दोस्तों स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस दोनों ही महान दिन है, और दोनों देश भक्ति और देशप्रेम की बात ही करते है, तो इनमे से कोई भी दिन हो आपको देश की बात ही करनी है.



        जब भी आप भाषण दे तो इस दिन के लिए जिन्होंने काम किया बलिदान दिया, उन क्रांतिकारी या सवतंत्रता सैनानियो का नाम अवश्य ले, साथ ही आदर भाव से धन्वाद करे की उन्ही की बदौलत ये दिन हम आज देख पा रहे है.



        कुछ पुरानी बाते इतिहास से कह सकते है, और कुछ नई बाते आज के दौर से जोड़ सकते है, आज के हालात के बारे में अपने विचार व्यक्त कर सकते है, और भविष्य के बारे में बात कर सकते है की हमें क्या करना चाहिए वगैरह.


        speech rules for stage




        भाषण देने को इंग्लिश में क्या कहते है



        दोस्तों भाषण देने को इंग्लिश में स्पीच देना कहा जाता है, और जो भाषण दे रहा है उसे एंकर कहा जाता है.



        मंच संचालक का एक नाम क्या है



        मंच संचालक को एंकर भी कहते है, वक्ता भी कहते है.



        एक अच्छा वक्ता कैसे बने



        अच्छा वक्ता बनने के लिए आपको प्रक्टिस करनी होगी, एक ही दिन में ये नहीं हो सकता, इसके लिए आपको अभ्यास करना होगा.



        बहुत सी जानकारियाँ आपके पास होनी चाहिए, बहुत से किस्से कहानियाँ आपको पता होनी चाहिए, साथ ही आज कल क्या चल रहा है उस बारे में भी आपको जानकारी रखनी चाहिए, तभी आप सही समय पर बोल सकते है.



        आप में विनम्रता होनी चाहिए, सबसे मेलजोल रखे, घमंड न करे, वक्त का हमेशा ख़याल रखे.



        राजनीति में भाषण कैसे दिया जाता है



        राजनीति के लिए जब भी भाषण तैयार करे तो आपको पता होना चाहिए की, आप किस विषय पर बोलने वाले है, हो सकता है वो चुनाव का दौर हो, तो आपको चुनावी भाषण देना होगा, अगर आप जीत चुके है और किसी आपदा या संकट की घडी पर बोलना है तो उसकी जानकारी जमा करे.



        अगर आपको किसी ने गेस्ट के रूप में बुलाया है तो आप वहा उस तरह की बात करे, साथ ही अपनी पार्टी के बारे में भी कोई ऐसी बात जो उस विषय से मेल खाती हो तो जरुर बोले.



        मंच पर बोलने की कला कैसे सीखे



        वाकई मंच पर बोलना एक कला ही है, क्योकि वैसे तो हजारो लोग बोलते है मगर याद बहुत कम ही रहते है, और जो याद रहते है समझो उन्हें बोलने की कला आती है, तभी तो वो हमें या आपको याद रहते है.



        उन्होंने कोई ऐसी बात जरुर किसी अंदाज में बोली होगी, जो आपके दिल को छू गई होगी, तो वो बात क्या थी वो अंदाज क्या था, बस यही तो आपको निरिक्षण करना है, और वो क्वालिटी खुद के अन्दर लानी है.



        ऐसे ही हर किसी से कुछ न कुछ आपको सिखने को जरुर मिलेगा, बस आप अपनी आँखे और कान खुले रखो, आपको एक विशाल पिटारा दिखाई देगा जिसमे से आप बहुत कुछ सिख सकते हो.



        मंच पर जब कोई बोले तो ध्यान से देखे सुने, की लोग उसे कितना सुन रहे है, अगर नहीं सुन रहे तो क्या गलती है उस पर ध्यान दे, और अगर सुन रहे है तो क्या खासियत है, बस यही तो आपको सीखना है की क्यों कोई टिक गया और क्यों कोई उखड गया.



        तात्कालिक भाषण क्या है



        दोस्तों तात्कालिक भाषण वो होता है जो आपको अचानक देना पड़ जाता है, जैसे की आप कही किसी और काम से गए हो और वहा पर आपको भाषण देने को कहा जाए तो, उसे ही तात्कालिक भाषण कहा जाता है.


        भाषण का मुख्य उद्देश्य क्या है



        भाषण का मुख्य उद्देश्य होता है जानकारी साझा करना, भाषण हमेशा किसी उद्देश्य से ही दिया जाता है, चाहे वो सामाजिक हो, राजनैतिक हो, या अन्य कोई हो, मगर सौ बातो की एक बात ये है की, सबका उद्देश्य होता है अपनी बात लोगो के बिच पहुचाना.


        Video For Anchoring on Stage



        FAQ



        How to start a speech?

        The speech should always start with a greeting, if you know the name of the people present, then greet them with the name and position, otherwise you can also use respectable and honorable words, and you can give your speech.

        How to give an effective speech?

        Friends, if you really want to give an effective speech, then you must take care of some things, as whatever you are going to say, it may not be heard, but you have gathered that information after studying deeply, then only you can tell it. Can be said in a very concrete way.

        How to learn to give a speech on stage?

        If you want to give a speech on the stage, then first know what is the stage, what is the speech, what are the types of speeches, otherwise you will end your story in just two words. Giving speech is also a kind of art or art, that is, in which way you say your words, in which manner, in which manner, that is called art, and if you speak well, then you get the art of speech.

        How the speech is delivered?

        There is no rule or law to give a speech that you have to give in this way or in this way, you can keep your point in any way, just if that thing reaches as far as you want to reach, then understand your speech. became successful.

        How to speak in society?

        The work of society is to maintain unity, and society makes us one in many, so never say immoral things, it is from the time of our fathers or grandfathers, so should also be respected, and society has fair opinion. It almost gives, if still there is such a thing that bothers you, then you should keep your word by being humble, it will make your image good in the people.

        How to deliver a speech in politics?

        Whenever you prepare a speech for politics, you should know that on which topic you are going to speak, maybe it is an election period, then you have to give an election speech, if you have won and there is no disaster or crisis. If you want to speak on the watch, then submit its information.

        What is improvised speech?

        Friends, improvised speech is that which you have to give suddenly, as if you have gone somewhere for some other work and if you are asked to give a speech there, it is called improvised speech.

        What is the main purpose of the speech?

        The main purpose of speech is to share information, speech is always given for some purpose, whether it is social, political, or any other, but one thing of a hundred things is that, everyone has a purpose. reach between